लंदन के मेयर सर सादिक़ खान हाजी हो गए

लंदन के मेयर सर सादिक़ खान हाजी हो गए

लेखक: फ़हीम अख़्तर, लंदन

सर सादिक़ खान ब्रिटेन की राजधानी लंदन के पहले मुस्लिम मेयर हैं और 2016 से इस पद पर आसीन हैं। पाकिस्तानी मूल के परिवार में जन्मे सादिक़ खान ने एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद अपनी मेहनत, शिक्षा और राजनीतिक संघर्ष के ज़रिए ब्रिटिश राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
वे ब्रिटेन की लेबर पार्टी के अहम नेताओं में शुमार होते हैं और विविधता, सामाजिक न्याय और अंतर-धार्मिक सद्भाव के समर्थक माने जाते हैं। उनका हज अदा करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे दुनिया के सबसे प्रभावशाली और विविधतापूर्ण शहरों में से एक के निर्वाचित मेयर हैं। हज के बाद उनके विचार और अनुभव न केवल ब्रिटेन के मुसलमानों बल्कि व्यापक वैश्विक समुदाय तक इस्लाम के शांति, समानता और भाईचारे के संदेश को पहुँचाने का ज़रिया बनेंगे।

हज इस्लाम का पाँचवाँ स्तंभ है और यह महज़ कुछ इबादतों या रस्मों के अदा करने का नाम नहीं, बल्कि एक ऐसी महान आध्यात्मिक यात्रा है जो इंसान को अपने स्व, अपने रब और पूरी मानवता के साथ संबंध को नए सिरे से समझने का अवसर प्रदान करती है। दुनिया के कोने-कोने से आने वाले लाखों मुसलमान एक ही पोशाक, एक ही स्थान और एक ही उद्देश्य के साथ इकट्ठा होते हैं तो रंग, नस्ल, भाषा, राष्ट्रीयता, धन और सामाजिक हैसियत के सभी भेद मिट जाते हैं। हज इंसान को यह अहसास दिलाता है कि दुनिया की सभी दिखावटी श्रेष्ठताएँ अस्थायी हैं और अल्लाह के निकट असली मापदंड केवल तक़वा, इख़लास और नेक चरित्र है।

हज की आत्मा वास्तव में हज़रत इब्राहीम, हज़रत हाजरा और हज़रत इस्माइल की बेमिसाल कुर्बानियों, इताअत और तवक्कुल की याद ताज़ा करती है। यह यात्रा इंसान को अपने नफ़्स का मुहासबा करने, गुनाहों से तौबा करने, दूसरों के लिए खैरख्वाही पैदा करने और अपनी ज़िंदगी को एक नई दिशा देने की दावत देती है। इसी वजह से करोड़ों मुसलमान हज को अपनी ज़िंदगी के सबसे अहम और यादगार अनुभवों में शुमार करते हैं। ऐसे में जब लंदन जैसे वैश्विक शहर के मेयर सादिक़ खान अपने हज के अनुभव को "ज़िंदगी को बहुत ज़्यादा बदलने वाला” करार देते हैं तो यह खबर महज़ एक राजनीतिक शख्सियत की धार्मिक यात्रा की सूचना नहीं रह जाती, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अख्तियार कर लेती है। पश्चिमी दुनिया के एक प्रमुख राजनीतिक नेता का हज के बारे में इतने सकारात्मक और आध्यात्मिक अंदाज़ में विचार व्यक्त करना इस बात की याद दहानी है कि इस्लाम की बुनियादी शिक्षाएँ वैश्विक मानवीय मूल्यों से मेल खाती हैं। समानता, एकता, विनम्रता, सहनशीलता और मानवता वे सिद्धांत हैं जिनकी आज की दुनिया को पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है।

सादिक़ खान का यह बयान कि ‘एहराम की हालत में खड़ा होना, इस बात की खूबसूरत याद दहानी है कि हम सब ख़ुदा के सामने बराबर हैं’, वास्तव में हज के सार्वभौमिक संदेश का सारांश है। यह संदेश सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। एक ऐसे दौर में जब दुनिया नस्लीय पूर्वाग्रहों, धार्मिक नफरतों, आर्थिक असमानताओं और राजनीतिक विभाजन का शिकार है, हज इंसानों के बीच समानता और भाईचारे का एक जीवंत और व्यावहारिक नमूना पेश करता है।

यही वजह है कि सादिक़ खान की हज से संबंधित बातचीत और तस्वीरें वैश्विक मीडिया में ध्यान आकर्षित कर रही हैं। यह खबर इस बात की भी निशानी है कि धार्मिक पहचान और सार्वजनिक सेवा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हो सकते हैं। हज का संदेश इंसान को बेहतर मुसलमान ही नहीं, बल्कि बेहतर इंसान और बेहतर नागरिक बनने की भी प्रेरणा देता है। यही वजह है कि सदियाँ गुज़रने के बावजूद हज की सार्थकता कम नहीं हुई, बल्कि आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में इसका महत्व और भी उभरकर सामने आ गया है। सादिक़ खान का हज अदा करना कई मायनों में महत्व रखता है। वे सिर्फ लंदन के मेयर नहीं, बल्कि ब्रिटेन की बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक पहचान का एक प्रमुख प्रतीक भी हैं। एक ऐसे समय में जब यूरोप और पश्चिमी दुनिया के कुछ हलकों में इस्लाम और मुसलमानों के बारे में गलतफहमियाँ और नकारात्मक धारणाएँ पाई जाती हैं, दुनिया की एक बड़ी राजधानी के मेयर का अपने धार्मिक कर्तव्य के पालन पर गर्व व्यक्त करना एक सकारात्मक संदेश है।

हज के दौरान इंसान अपनी सामाजिक हैसियत, राजनीतिक ताकत, वित्तीय साधनों और सांसारिक पहचानों को पीछे छोड़ देता है। एहराम के दो सादे कपड़ों में एक आम मज़दूर, एक कारोबारी शख्सियत, एक आलिम-ए-दीन, एक बादशाह और एक राजनीतिक नेता एक ही पंक्ति में खड़े होते हैं। यही वह दृश्य है जिसने सादिक़ खान को यह कहने पर मजबूर किया कि हज इस बात की याद दहानी है कि हम सब ख़ुदा के सामने बराबर हैं। दरअसल, यही धारणा इस्लाम के उस मूल दर्शन को दर्शाती है जिसमें इंसानों की महानता का मापदंड उनका धन, नस्ल या सत्ता नहीं, बल्कि उनका चरित्र और तक़वा है। सादिक़ खान के बयान में एक और अहम नुक्ता काबिल-ए-तवज्जो है। उन्होंने हज को सिर्फ शारीरिक मशक्कत या धार्मिक रस्मों का समूह नहीं बताया, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक सफर कहा है। आधुनिक दौर की तेज़-रफ्तार और भौतिकवादी ज़िंदगी में इंसान अक्सर अपने बातिन, अपनी ज़िम्मेदारियों और अपने मकसद-ए-हयात से दूर हो जाता है। हज इंसान को कुछ दिनों के लिए सांसारिक व्यस्तताओं से अलग करके आत्म-परीक्षण, दुआ, तौबा और आध्यात्मिक नवीकरण का अवसर प्रदान करता है। यही वजह है कि दुनिया भर के लाखों मुसलमान हज से वापसी पर अपनी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलावों का ज़िक्र करते हैं।

सादिक़ खान का जन्म एक पाकिस्तानी परिवार में हुआ था। उनके पिता रोज़गार के सिलसिले में पाकिस्तान से लंदन हिजरत करके आए थे और लंदन में बस ड्राइवर थे। सादिक़ खान का पूरा परिवार दक्षिणी लंदन के काउंसिल एस्टेट (वह रिहायशी मकान जिसमें कम आमदनी या गरीब लोग रहते हैं) में आबाद था। इसी वजह से सादिक़ खान ने हमेशा अपने भाषण में इस बात का ज़िक्र किया कि वह एक बस ड्राइवर का बेटा हैं और उनकी परवरिश एक काउंसिल एस्टेट में हुई है। सादिक़ खान पेशे से एक वकील हैं और उन्होंने सांसद बनने से पहले मानवाधिकार वकील के तौर पर काम किया था। उनकी शादी सादिया से तीस साल पहले हुई थी और उनकी दो बेटियाँ हैं। सादिक़ खान की पत्नी सादिया भी पेशे से एक वकील हैं। सादिक़ खान के पास एक कुत्ता भी है जिसे वे अक्सर अपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हैं।

सादिक़ खान और उनके घर वाले हमेशा रमज़ान पाबंदी से मनाते हैं। सादिक़ खान का कहना है कि उन्होंने टूटिंग और बालहम के इलाके में मदरसे में अरबी और दीनियात की तालीम हासिल की, जिसकी वजह से कम उम्र से ही उन्हें तौहीद, नमाज़, ज़कात, रोज़ा और हज जो कि इस्लाम के पाँच स्तंभ हैं, का ज्ञान हुआ। सादिक़ खान ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी जवानी के अधिकतर दिन अतिवाद के खिलाफ लड़ने में गुज़ारे। 2023 में सादिक़ खान ने उमरा की भी सदाकत हासिल की थी, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर फख्रिये पेश भी किया था।

यह भी हकीकत है कि हज मुसलमानों के वैश्विक एकता की सबसे बड़ी व्यावहारिक मिसाल है। अलग-अलग ज़ुबानें बोलने वाले, अलग-अलग संस्कृतियों से ताल्लुक रखने वाले और अलग-अलग आर्थिक पृष्ठभूमि रखने वाले मुसलमान एक ही केंद्र के इर्द-गिर्द इकट्ठा होते हैं। आज जब दुनिया विभाजनों का शिकार है, हज यह सबक देता है कि साझा मूल्य और उच्च उद्देश्य इंसानों को एक-दूसरे के करीब ला सकते हैं। यही वह पैग़ाम है जिसकी गूंज लंदन के मेयर सर सादिक़ खान के अल्फ़ाज़ में सुनाई देती है। इस खबर की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है कि यह हज को सिर्फ एक धार्मिक फर्ज के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसी मानवीय और नैतिक प्रशिक्षण भूमि के रूप में पेश करती है जो इंसान को विनम्रता, सब्र, सहनशीलता, सेवा और समानता का पाठ पढ़ाती है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में नेतृत्व के संकट, राजनीतिक तनाव और सामाजिक असमानता के माहौल में हज की ये शिक्षाएँ असाधारण सार्थकता अख्तियार कर लेती हैं।

सादिक़ खान का हज अदा करना यकीनन उनका निजी और धार्मिक मामला है, लेकिन उनके अनुभव की अभिव्यक्ति एक व्यापक संदेश भी रखती है। यह संदेश इस हकीकत की याद दहानी है कि धर्म, जब अपनी मूल आत्मा के साथ समझा और अपनाया जाए, इंसानों के बीच फासले कम करता है, दिलों को जोड़ता है और उन्हें साझा मानवीय मूल्यों की ओर मुतवज्जे करता है। हज इसी सार्वभौमिक संदेश का सबसे रौशन मज़हर है, और शायद यही वजह है कि इसे अदा करने वाले अक्सर इसे अपनी ज़िंदगी का सबसे यादगार और रूह को झिंझोड़ देने वाला अनुभव बताते हैं। मैं लंदन के मेयर सर सादिक़ खान को हज की अदायगी के लिए दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ।

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