45वीं लंदन मैराथन

लेखक: फहीम अख्तर, लंदन

बचपन से हमें दौड़ने का बेहद शौक था। कलकत्ता में गलियों और मैदानों में दौड़ते हुए शायद हमें वो बेसाख्ता आज़ादी महसूस होती थी जो कदमों के साथ दिल में भी उतरती चली जाती थी। दौड़ना महज़ एक खेल नहीं था बल्कि अपने आप से एक खामोश मुकालमा था, जहाँ साँसों की रफ्तार और दिल की धड़कन एक ही ताल में बंध जाती थीं।

वक्त के साथ यह शौक कहीं मध्यम पड़ गया। शायद यह उम्र का तकाज़ा है, या ज़िंदगी की मसरूफियत। अब हम खुद दौड़ते कम हैं, मगर दौड़ने वालों को देखकर दिल में एक हल्की सी जुम्बिश ज़रूर पैदा होती है, जैसे कोई पुरानी सदा हमें पुकार रही हो। ऐसे में लंदन मैराथन का ज़िक्र महज़ एक खेल की खबर नहीं रहता, बल्कि इंसानी हौसले और अज़्म की एक जीती-जागती तस्वीर बन जाता है। हम इस दौड़ का हिस्सा नहीं बनते, मगर इसे देखते, महसूस करते और इसके ज़रिए अपनी ही गुज़री हुई दौड़ों की बाज़गश्त सुनने लगते हैं।

कहते हैं कि आपको अपनी सेहत को फायदा पहुँचाने के लिए हफ्ते के हर दिन दौड़ने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि हर रोज़ चंद मिनट दौड़ना आपके लिए अच्छा हो सकता है। शोध से पता चलता है कि यह आपकी ज़िंदगी को बढ़ा सकता है। हर रोज़ दौड़ने से सेहत के कुछ फायदे हो सकते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि रोज़ाना सिर्फ पाँच से दस मिनट की मध्यम रफ्तार से दौड़ने से आपको दिल के दौरे, स्ट्रोक, और अन्य आम बीमारियों से मौत के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसी शोध से यह भी पता चलता है कि ये फायदे हफ्ते में चार घंटे में सबसे ज़्यादा होते हैं। यानी हर रोज़ घंटों दौड़ने की ज़रूरत नहीं है। दौड़ना एक उच्च प्रभाव वाली कसरत है लेकिन यह भी माना जाता है कि ज़रूरत से ज़्यादा ट्रेनिंग देने से तनाव, फ्रैक्चर और पिंडली की चोटों जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

लंदन मैराथन दुनिया के मशहूर तरीन मुकाबलों में से एक है, जहाँ हज़ारों लोग न केवल दौड़ में हिस्सा लेते हैं बल्कि सेहतमंद जीवनशैली की अहमियत को भी उजागर करते हैं। यह इवेंट महज़ एक खेल नहीं बल्कि शारीरिक और मानसिक सेहत के प्रचार का एक वैश्विक संदेश बन चुका है। लंदन के लोग आमतौर पर सेहत का खास ख्याल रखते हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पैदल चलने, जॉगिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियों में भरपूर दिलचस्पी दिखाते हैं। पार्कों, सड़कों और दरिया के किनारे अक्सर लोगों को दौड़ते या कसरत करते देखा जा सकता है, जो इस बात का सबूत है कि यहाँ की कम्युनिटी फिटनेस को अपनी ज़िंदगी का अहम हिस्सा समझती है। यही रुझान लंदन मैराथन जैसे बड़े इवेंट्स में भी साफ़ तौर पर नज़र आता है।

लंदन मैराथन में शामिल होने वाले लोग महीनों की मेहनत और ट्रेनिंग के बाद इस दिन का सामना करते हैं। यह प्रक्रिया खुद अनुशासन, निरंतरता और मज़बूत इरादे की मिसाल है। कहते हैं कि नियमित दौड़ने से दिल की सेहत बेहतर होती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। यही वजह है कि ऐसे इवेंट्स लोगों को कसरत की तरफ आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, स्पोर्ट्स का एक अहम पहलू मानसिक सेहत भी है। दौड़ने या किसी भी शारीरिक गतिविधि के दौरान दिमाग में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो खुशी और सुकून का अहसास देते हैं, जिससे मानसिक तनाव में कमी आती है। यही वजह है कि मैराथन में हिस्सा लेने वाले लोग अक्सर खुद को ज़्यादा आत्मविश्वासी और सकारात्मक महसूस करते हैं।

आइए आज आपको लंदन मैराथन के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं। लंदन मैराथन लंदन में आयोजित होने वाली लंबी दूरी की वार्षिक प्रतियोगिता है। दुनिया की छह सबसे बड़ी मैराथन में लंदन मैराथन भी शामिल है। लंदन मैराथन हर साल दुनिया भर से हज़ारों दौड़ने वालों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। यह रेस 26.2 मील की दौड़ पर आधारित है जो लंदन की सड़कों से गुज़रती है। लंदन मैराथन में दौड़ने वाले प्रसिद्ध लैंडमार्क से गुज़रते हैं जिनमें क्वींस हाउस और नेशनल मैरीटाइम म्यूज़ियम, कटी सार्क, टॉवर ब्रिज, टॉवर ऑफ़ लंदन, कैनरी वार्फ, लंदन आई, बिग बेन, पार्लियामेंट और बकिंघम पैलेस अहम हैं।

पहली लंदन मैराथन 1981 में आयोजित हुई थी, जिसे एथलीट क्रिस ब्रेशर और जॉन डिस्ले ने व्यवस्थित किया था। बड़े पैमाने पर इस दौड़ को आम लोगों के लिए रखा गया है जिसे मुख्य आयोजन समझा जाता है। इसमें ज़्यादातर लोग चैरिटी के लिए रकम इकट्ठा करने के लिए दौड़ते हैं और विभिन्न चैरिटी के लिए एक अरब पाउंड से भी ज़्यादा जमा किए जाते हैं। हालाँकि दुनिया भर के प्रसिद्ध एथलीट भी लंदन मैराथन में हिस्सा लेकर बड़े-बड़े इनाम जीतते हैं। लंदन के सबसे लोकप्रिय 45वें मैराथन में इस बार 59,000 से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया जो कि एक रिकॉर्ड और सराहनीय बात है। इसके अलावा लंदन मैराथन में शामिल होने के लिए 1.13 मिलियन लोगों ने बैलट में हिस्सा लिया, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है और जिसकी वजह से लंदन मैराथन दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैराथन बना। इस मैराथन में चैरिटी के लिए पैसा इकट्ठा करने वाले, शौकिया दौड़ने वाले और एथलेटिक दौड़ने वालों ने 26.2 मील यानी कि 42.2 किलोमीटर का फासला ब्लैकहीथ से शुरू करके ‘द मॉल’ पर खत्म किया जो कि बकिंघम पैलेस के सामने का इलाका है।

प्रशासन ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इस बात की जानकारी दी कि इस बार मैराथन में हिस्सा लेने वालों की संख्या पिछले कई सालों के मुकाबले और बढ़ गई है जो कि एक बहुत ही खुशी की बात है। लंदन मैराथन की तैयारी पूरे साल की जाती है और इस बार इसे मशहूर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने स्पॉन्सर किया है। इसके अलावा अन्य कंपनियाँ भी इसमें हिस्सा लेती हैं और लंदन मैराथन को कामयाब बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। लंदन मैराथन में एक खास बात यह है कि इसमें बहुत सारे हिस्सा लेने वाले लोग तरह-तरह के फैंसी ड्रेस पहनकर दौड़ते हैं जो कि देखने वालों के लिए बहुत ही दिलचस्प और मज़ेदार होता है। ज़्यादातर दौड़ने वाले अपनी-अपनी चैरिटी के लिए पैसा वसूल करते हैं और इस बात की उम्मीद की जा रही है कि इस साल विभिन्न चैरिटी का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग पिछले कई वर्षों के मुकाबले एक अरब पाउंड से ज़्यादा की रकम इकट्ठा करके पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे।

लंदन मैराथन के आयोजकों का मानना है कि मैराथन से लोगों में अपनी सेहत का ख्याल रखने की जागरूकता बढ़ी है और इस तरह से ब्रिटेन के दूसरे शहरों में भी हाफ मैराथन का इंतज़ाम किया जाता है। इनमें न्यूकैसल, बर्मिंघम, मैनचेस्टर, लिवरपूल आदि के नाम अहम हैं। हाफ मैराथन की लोकप्रियता में काफी इज़ाफा हुआ है जो कि एक अच्छी बात मानी जा रही है। इसके अलावा विभिन्न काउंसिल ने शहर में दौड़ने वालों की लोकप्रियता को देखकर हर साल इसकी प्रगति के लिए कई लाख पाउंड खर्च कर रही हैं। लंदन मैराथन का एक और खूबसूरत पहलू इसका सामाजिक प्रभाव है। लोग विभिन्न कल्याणकारी संस्थाओं के लिए चंदा जमा करते हैं, जिससे न केवल कम्युनिटी सपोर्ट को बढ़ावा मिलता है बल्कि मानवता की सेवा का जज़्बा भी बढ़ता है। इस तरह यह इवेंट खेल के साथ-साथ हमदर्दी और सहयोग की निशानी भी बन जाता है।

दुनिया भर में आयोजित होने वाली मैराथन्स में लंदन मैराथन को एक अनूठा स्थान प्राप्त है, जहाँ पेशेवर खिलाड़ियों के साथ आम लोग भी अपनी व्यक्तिगत जद्दोजहद को एक वैश्विक कहानी में बदल देते हैं। यह दौड़ सिर्फ रफ्तार का इम्तिहान नहीं बल्कि इंसानी हौसले का भी पैमाना है। लंदन मैराथन हर साल अप्रैल के आखिर में होती है और इस साल रविवार 26 अप्रैल को आयोजित हुई। लंदन मैराथन में ज़्यादातर दौड़ने वालों में हमदर्दी का एक खास जज़्बा पाया जाता है जो इस मौके का फायदा उठाकर अपनी-अपनी चैरिटी के लिए बड़ी रकम इकट्ठा करते हैं। ऐसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स न केवल शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देते हैं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का ज़रिया भी बनते हैं। लंदन मैराथन हमें यह सबक देती है कि सेहतमंद ज़िंदगी के लिए निरंतरता, मेहनत और सकारात्मक सोच बहुत ज़रूरी है।

लंदन मैराथन के बारे में एक खूबसूरत हकीकत यह है कि यह महज़ एक दौड़ नहीं बल्कि इंसानी कहानियों का एक दरिया है। हर साल हज़ारों कदमों की चाप में किसी का दुख, किसी की उम्मीद और किसी की जीत छिपी होती है। लंदन की सड़कों पर जब हज़ारों कदम एक साथ हरकत करते हैं तो यह सिर्फ एक रेस नहीं रहती, यह ज़िंदगी की एक जीती-जागती कहानी बन जाती है। लंदन मैराथन में दौड़ने वाला हर व्यक्ति अपनी एक अलग दास्तान लेकर निकलता है, कोई अपने किसी प्यारे की याद में, कोई बीमारी को शिकस्त देने के जज़्बे के साथ, और कोई महज़ इस यकीन के साथ कि मंज़िल तक पहुँचना मुमकिन है, चाहे रास्ता कितना ही लंबा क्यों न हो।

कुछ दौड़ें फासले तय करने के लिए नहीं होतीं, बल्कि खुद को पहचानने के लिए होती हैं। लंदन मैराथन भी ऐसी ही एक दौड़ है जहाँ हर साँस में एक कहानी और हर कदम में एक जज़्बा छिपा होता है। कोई आँसुओं के साथ दौड़ता है, कोई मुस्कराहट के साथ, मगर सबके दिल में एक ही ख्वाहिश होती है—हार न मानना। लंदन की सड़कें उस दिन कुछ और ही किस्सा सुनाती हैं। जब लंदन मैराथन के कदम उन पर पड़ते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हर रास्ता एक ख्वाब की ताबीर बन गया हो। कोई थकान को, कोई यादों को, और कोई खुद को मात देता है। मैं लंदन मैराथन में हिस्सा लेने वालों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ और उनके इस जज़्बे का सम्मान करता हूँ।

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